52 भैरव (बावन भैरव) Bhairava (Fifty-two Bhairava)

52 भैरव (बावन भैरव)
शैव–तांत्रिक परंपरा में भगवान शिव के उग्र रूप भैरव के 52 स्वरूप माने गए हैं। इन्हें बावन भैरव कहा जाता है। ये काल, दिशा, तत्व और साधना–परंपराओं के रक्षक माने जाते हैं। विशेष रूप से काशी क्षेत्र में इनका महत्व अधिक है।

52 भैरवों की मान्य सूची (प्रचलित नाम)

1. असितांग भैरव


2. काल भैरव


3. बटुक भैरव


4. रुरु भैरव


5. चंड भैरव


6. क्रोध भैरव


7. उन्मत्त भैरव


8. कपाल भैरव


9. भीषण भैरव


10. संहार भैरव


11. नाग भैरव


12. नागेश भैरव


13. महाकाल भैरव


14. सिद्ध भैरव


15. योगी भैरव


16. भीम भैरव


17. विकट भैरव


18. वीर भैरव


19. प्रचंड भैरव


20. अनल भैरव


21. भूतनाथ भैरव


22. क्षेत्रपाल भैरव


23. श्मशान भैरव


24. काशीश्वर भैरव


25. राक्षस भैरव


26. दंड भैरव


27. उग्र भैरव


28. तांडव भैरव


29. नीलकंठ भैरव


30. शूलपाणि भैरव


31. वज्र भैरव


32. नागार्जुन भैरव


33. भैरवेश्वर


34. त्र्यम्बक भैरव


35. कंकाल भैरव


36. मुण्ड भैरव


37. शर्व भैरव


38. शूलधर भैरव


39. दिगंबर भैरव


40. महावीर भैरव


41. भद्र भैरव


42. अमोघ भैरव


43. जय भैरव


44. विजय भैरव


45. सिद्धेश भैरव


46. वाम भैरव


47. दक्षिण भैरव


48. ईशान भैरव


49. आग्नेय भैरव


50. नैऋत्य भैरव


51. वायव्य भैरव


52. उत्तर भैरव



> ध्यान दें: अलग–अलग ग्रंथों व परंपराओं में नामों की सूची में थोड़े अंतर मिल सकते हैं, पर संख्या 52 सर्वमान्य है।



महत्व

ये शक्ति–क्षेत्रों के रक्षक और तांत्रिक साधनाओं के अधिष्ठाता माने जाते हैं।

भय, बाधा, नकारात्मकता से रक्षा तथा अनुशासन, वैराग्य और सिद्धि का प्रतीक हैं।

काशी में काल भैरव को प्रमुख क्षेत्रपाल माना जाता है।


यदि आप चाहें तो मैं प्रत्येक भैरव का संक्षिप्त परिचय, काशी के 52 भैरवों का मानचित्र/क्रम, या भैरव उपासना का सांस्कृतिक–ऐतिहासिक विवरण भी बता सकता हूँ।

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