1वेदिक मंत्र
जो वेदों से लिए गए हैं। ये शुद्ध, सात्त्विक और सार्वभौमिक माने जाते हैं।
उदाहरण: गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र
2 तांत्रिक मंत्र
तंत्र शास्त्र पर आधारित होते हैं। इनमें बीज मंत्र, शक्ति उपासना और विशेष साधनाएँ होती हैं।
उदाहरण: क्लीं, ह्रीं, श्रीं, ऐं
3 पौराणिक मंत्र
पुराणों और उपाख्यानों से जुड़े मंत्र, देव-देवी की स्तुति के लिए।
उदाहरण: विष्णु मंत्र, शिव मंत्र, दुर्गा मंत्र
4 बीज मंत्र
एक या दो अक्षरों के शक्तिशाली मंत्र, जिनमें गहरी ऊर्जा निहित होती है।
उदाहरण: ॐ, ह्रीं, क्लीं, ऐं
5 स्तुति मंत्र
देवताओं की प्रशंसा और गुणगान के लिए।
उदाहरण: शिव स्तुति, विष्णु स्तुति
6 गायत्री मंत्र
विशेष छंद में रचित मंत्र, जिनका उद्देश्य बुद्धि और आत्मशुद्धि है।
उदाहरण: आदित्य गायत्री, शिव गायत्री
7 शांति मंत्र
मानसिक, शारीरिक और वातावरण की शांति के लिए।
उदाहरण:
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
8 रक्षा मंत्र
नकारात्मक शक्तियों और भय से सुरक्षा के लिए।
उदाहरण: नारायण कवच मंत्र
संक्षेप में कहा जाए तो मंत्रों को वेदिक, तांत्रिक, बीज, स्तुति, गायत्री, शांति और रक्षा—इन प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।